RBI ने लगातार तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है। 2025 में कई बार ब्याज दरों में बदलाव के बाद फिलहाल EMI, होम लोन और नए लोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जानिए रेपो रेट की पूरी टाइमलाइन और RBI के ताजा फैसले का मतलब।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा, बस यहीं पर। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को इसका एलान करते हुए कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात , महंगाई और वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में रेपो रेट आधारित होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पहले जैसी ही रहेगी।
पिछले साल RBI ने ब्याज दरों को लेकर कई अहम फैसले लिए थे। फरवरी 2025 में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया गया। फिर अप्रैल में 0.25 प्रतिशत , और जून में 0.50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई। दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत तक आ गया। अब लगातार तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में इसे इसी स्तर पर रोक कर रखा गया है, जैसे कि मामला यहीं ठहर गया हो।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने तीन दिन तक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों की समीक्षा करके ये तय किया कि रेपो रेट स्थिर ही रखा जाए। केंद्रीय बैंक का कहना है कि महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक विकास को सही तालमेल के साथ आगे बढ़ाने के लिए मौजूदा ब्याज दरें फिलहाल “ठीक” हैं , यानि अभी कुछ करने की जरूरत नहीं।
रेपो रेट को स्थिर रखने का फायदा सबसे पहले मौजूदा लोन धारकों को मिलेगा। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा। नए लोन भी मौजूदा ब्याज दरों के आसपास ही मिलने की उम्मीद है। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी अभी बड़ा उछाल या कोई बड़ा बदलाव आने का संकेत नहीं है, हालांकि अलग अलग बैंक अपनी नीतियों के हिसाब से सीमित बदलाव कर सकते हैं।
RBI ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई, वैश्विक आर्थिक हालात और घरेलू बाजार की गतिविधियों का फिर से आकलन करके आगे की मौद्रिक नीति बनाई जाएगी। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बनी रहती है, तो भविष्य की बैठकों में ब्याज दरों पर फिर से विचार हो सकता है। फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने से आम लोगों और वित्तीय बाजार—दोनों को एक तरह का स्थिरता वाला संदेश गया है।




