CJP के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना का अपना पक्ष रखा। परिजनों ने कहा कि ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए जवानों के साहस, संघर्ष और उनके परिवारों की पीड़ा को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों ने साझा किया अपना दर्द जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवार सामने आए हैं। हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उस दिन की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की बात भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जानी चाहिए, जितनी अन्य पक्षों की सुनी जाती है।
परिजनों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए थे। उनका कहना है कि भीड़ की ओर से पत्थर, गमले और जूते-चप्पल फेंके गए, जिससे 5 IPS अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं, इस घटना में करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे।
घायल सब-इंस्पेक्टर के बेटे कुंजल ने बताया कि उनके पिता जंतर-मंतर पर फ्रंट लाइन बैरिकेड पर तैनात थे। वह घर लौटने के बाद अक्सर कहते थे कि प्रदर्शन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं लग रहा था और इसमें कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं।
कुंजल ने बताया कि अगले ही दिन उनके पिता हिंसा में घायल हो गए। जब उन्होंने अस्पताल में उन्हें देखा तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। सिर में चार टांके लगने के बावजूद उन्होंने बेटे को हिम्मत देते हुए कहा, “बेटा, कोई बात नहीं… चोट लगती रहती है।”
कुंजल का कहना है कि सोशल मीडिया पर पुलिस का पक्ष कम दिखाई देता है। इसी वजह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया ताकि घायल पुलिसकर्मियों की बात भी सामने आ सके।
घायल एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि 20 जुलाई की सुबह उनके पति ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। दिन में उन्होंने फोन कर बताया था कि भीड़ बढ़ रही है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे हैं।
शाम को सूचना मिली कि उन्हें इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीमा के अनुसार, हमले के दौरान उनके पति का हेलमेट पूरी तरह टूट गया था।
उन्होंने कहा, “अगर पत्थर सीधे सिर पर लगता, तो शायद वो आज हमारे बीच नहीं होते।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवारों ने सरकार और सांसदों से आग्रह किया कि संसद में केवल प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की परिस्थितियों पर भी चर्चा हो।
उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनके साहस, सेवा और बलिदान को भी उचित सम्मान और संवेदनशीलता मिलनी चाहिए।
परिजनों ने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि जंतर-मंतर हिंसा से जुड़े हर पक्ष को निष्पक्ष रूप से सुना जाए। उनका विश्वास है कि यदि सभी पक्षों की बात सामने आएगी, तो घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी और ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों को भी न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी।


